सोपानतंत्र बनाम समानता की एक नई बहस: प्रो. एसएम पटनायक

सोपानतंत्र बनाम समानता की एक नई बहस: प्रो. एसएम पटनायक



लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग की ओर से मालवीय सभागार में जनजाति, जाति और परिवार विषय पर दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। उत्कल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस.एम. पटनायक ने कहा कि भारत में अंग्रेजों ने जनजाति को जाति से नीचा दिखाया गया और जाति को भी उच्च एवं निम्न में बांटा गया जिसने सोपनतंत्र बनाम समानता की एक नई बहस को जन्म दिया।

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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रो. आर.के. जैन ने कहा कि बदलते सामाजिक परिवर्तनों में जाति, जनजाति और परिवार तीनों की परिभाषाएं बदल रहीं है। इनका स्वरूप जिस तरह पहले था अब नहीं है। ऐसे में तीनों की प्रक्रिया शक्ति और व्यवहारों को समझने की जरूरत है। लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति जी. पटनायक ने कहा कि परिवार में संरचनात्मक बदलाव आ रहा है। बच्चों और युवाओं की मनोवृत्ति बदल रही है ऐसे में अभिभावकों को भी बदलना होगा।

आधुनिक समाजशास्त्र की एक प्रमुख जरूरत यह है कि इन अवधारणाओं पर पुनर्विचार किया जाए। संगोष्ठी के संयोजक प्रो. सुकान्त कुमार चौधरी ने कहा कि भारत को परिवार विशिष्ट देश कहा गया है, लेकिन अगर लैंगिक समानता का विशलेषण किया जाए तो भारत में कभी परिवार रहा ही नहीं। आज जिन घरों में लैंगिक समानता है वही सही मायने में परिवार हैं। अत: हमें इन अवधारणाओं का पुर्नमूल्यांकन एवं पुन: परिभाषित करने की आवश्यकता है, जिससे समसामयिक दशाओं में समाज में अपना अस्तित्व बनाए रख सकें।

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